अच्छा जरा चाय पिलाओ

कभी नज़र हमें भी तो आओ
अरे छिप क्यों रहे हो नजरे तो मिलाओ

पहले भी तो मिले थे
मौसम कल भी तो खिले थे

अरे अब जरा चेहरा तो दिखाओ
जरा आंखो मे ठहर तो जाओ

अच्छा चलो जरा चाय पिलाओ
कुछ अपनी कुछ दिल की सुनाओ

जरा नज़ाकत से तो पेश आओ
उधर नहीं इधर आओ

कल का हल सुनाओ
आंखे शरमा कर चेहरा छुपाओ

मेरी कही बात पर जरा तो मुस्कुराओ
बालों गुलाब का संदेश तो लगाओ

फूलों से महकता गजरा से सजाओ
मेरे उपहारों को पाकर कुछ बातें तो सुनाओ

अच्छा चलो चाय की प्याली लाओ
सुरूली आवाज का शक्कर तो मिलाओ

आंखो जरा मुझे चाय पिलाओ
आओ मेरे पास आओ।

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