कौने खेतवा मां अनजवा उगहिहो

जब तुम अयिहो तब का खाइहो
कौने खेतवा मां अनजवा उगहिहो

सब तो बनाए डारेऊ पक्की जमीनिया
नाय राखेओ कौनो कच्ची मिनिया

अभहीन के तुम फायदा देखेओ
जमींवा से पैसा ज्यादा देखैव

कौने डाहरी मा से अनाजवा निकलहिओ
बीन खेत के तुम कैसे जिहाओ

दूई पग कच्ची जमिनिया है
देखौ तुम्हारी भी मुनिया हय

जो तुम ई पर भी डामर चलवाहियाओ
पेटवा का तुम कैसे जियाहियाओ

सीमेंट भी मानी पैसा भी मानी
पेटवा कर जाई अपन मनमानी

जो तुम ई पर भी सीमेंट भरवईहओ
अनाज कै बदले मां का सीमेंटवा चबाईहओ

इटा खाईहओ की खपटा खाईहओ
न डहरी मां पाईहओं न खेतवा ही पईहओ
रोटी न पईहओ कच्ची से जो पक्का बनईहओ

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