अंधेरे में मुझको खो जाने दो।

मुझे अंधेरे में खो जाने दो
ख़ुद की तस्वीर तो नज़र आने दो

क्या हूं मैं किधर खोई हूं
क्यों आख़िर देर रात भी नहीं सोई हूं

क्या वाकई किसी का ख्याल है ये
ख़ुद से मेरा ये सवाल है ये

मुझे अंधेरे को भी समझ जाने दो
मेरी ज़िंदगी के भी कुछ तो मायने हो

पहचान्ना चाहती हूं ख़ुद को
क्या तुम वही बुत हो

क्यों मुझे रोशीनी मे लाए
ख़ुद की मात कभी तो खाए

आज आया है मोका संभल जाने दो
मैं क्या हूं मुझे भी पहचान जाने दो

कब तक आखिर रहूंगी भ्रम में
कितना करूंगी उजाले की शर्म मैं

अब तो मुझे मेरे पास आने दो
तुम चाहे मुझे लाख ताने दो
पर अंधेरे से मुझको पहचान तो जाने दो

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