डमरू घनाक्षरी छंद

(डमरू घनाक्षरी)

मन यह नटखट, छण छण छटपट,
मनहर नटवर, कर रख सर पर।

कल न पड़त पल, तन-मन हलचल,
लगत सकल जग, अब बस जर-जर।

चरणन रस चख, दरश-तड़प रख,
तकत डगर हर, नयनन जल भर।

मन अब तरसत, अवयव मचलत,
नटवर रख पत, जनम सफल कर।।

********

*डमरू घनाक्षरी* विधान:-

यह 32 वर्ण प्रति पद की घनाक्षरी है। ये 32 वर्ण 16 – 16 वर्ण के दो यति खंड में विभक्त रहते हैं। परंतु 8 8 8 8 वर्ण के चार यति खंड में विभक्त करने से छंद की रोचकता बढती है। इस घनाक्षरी की खास बात जो है वह यह है कि ये 32 के 32 वर्ण लघु तथा मात्रा रहित होने चाहिए। सभी घनाक्षरी की तरह इसके भी चारों पद एक ही तुकांतता के रहने चाहिए।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया

Leave a Reply