बुढ़ापे का साथ।

बाबा लाए झाबा भरके,
हम जागेन भोरे तड़के

देखीन जैसे बाबा आए,
बाबइन धीरे से मुस्कियाए,

लड़वाए भागे आगे पाछे
दाढ़ी उनकी लड़कवाए खाचे,

बाबइन भीतर से शरबत लइके आई,
बाबा देखीन जोरे से शर्माइन,

जब बाबा खाना खाईन
तब जायके दुनियन के हाल बताइन,

बाबा बाबइन साथ निभाईन
दुई जून रोटी संझे के टाइम बाती

वही भाईन साथी
बिगारे का उनकै हाथी।

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