चलो उस ओर जहां सूरज चमके।

बात का तर्क करके,
सही गलत का फर्क करके,
उड़ी हूं मैं परिंदा बन के,
चलो उस ओर जहां सूरज कि तरह चमके।

हवाओं की तरह बहें,
आसमां से सब कुछ कहें,
समुंद्र की लहरों से खेले,
घूम आए दुनिया के मेले,
सितारों की तरह चलो हम भी दमके,
चलो उस ओर जहां सूरज की तरह चमके।

गलियों का खेले खेल,
बनाए हम बच्चो की तरह मेल,
लड़े झगड़े फिर से एक
किताब नहीं हकीकत मे करे
सवाल हल टिकोड़ और सम के,
चलो उस ओर जहां सूरज की तरह चमके।

न सहूर न माहुर
घूमे हम चाहु ओर
किसी का न हो जोर
मां कान पकड़ खीच ले जाए
कुएं का पानी दिन भर सींचा जाए।
दादी करे छड़ी की रहम के,
चलो उस ओर जहां सूरज चमके।

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