अवधि कविता।

हम गए एक ताल
बिछावाय मच्छरी के जाल हम बताई ऊ तलवा के हाल
बाबा बैइठे बिरवा के नीचे, लड़कावें झुलुवा झूले ऊंचे,
पट दे से कूदे ऊ बाबा भागे दूर ये दूर
एक लड़कवा आईसे कुदिश, बाबा की लाठी उकई कुटिश।
लड़कवा भागे बाबा के बाग मा,
बाबा भागे बिन देखे जाल मा,
फस गए बाबा मच्छरी के जाल मा,
लड़कावे कहे आजा बालमा।
दौरत दौरात एक काका आय,
बाबा से पहिले बच्चन का भागये
निकले बाबा जाल से।
लड़कवए भागे साथ माल के,
न रहिगये धोती पकड़त,
लड़केवए भागे सरपट सरपट।

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