जिंदगी के कैमरे से दूर हूं मैं।

जिंदगी के कमरे से दूर हूं मैं
अकेली पर सबसे महफूज हूं मैं
न रहेंगी निगाहें मुझ पर किसी की
न दुनिया मुझे लगाएगी दुःखी सी।

लोग कहते है बेसहूर हूं मैं
जिंदगी के कैमरे से दूर हूं मैं।

करूंगी अपनी मन मर्जी,
नहीं चलेगी किसी की फर्जी
डाली है मेने भी अर्जी
नहीं कहना अब किसी को भी “सर जी”।

खुद से हूं, खुद मे हुजूर हूं मैं
जिंदगी के कैमरे से दूर हूं मैं।

करूंगी खुद की खुदगर्जी
आखिर मैं भी तो हूं रानी मुखर्जी,
बे मेल चप्पल बे मेल चोटी,
दुनिया के लिए होंगी मैं खोटी।

किसी की नही दिल कि सुहूर हूं मैं
जिंदगी के कैमरे से दूर हूं मैं।

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