इनामात की खरीद फरोख्त

गर पास में है तुम्हारे बेशुमार दौलत ,
तभी मिलेगी तुम्हें बेशुमार इज्जत ।

दौलत नहीं तो कोई भी नहीं पूछेगा,
चाहे तुममें हो कितनी भी शराफत ।

यह जज़्बात औ ख्याल सब फिजूल ,
तुम्हें करनी होगी किसी की खुशामद।

तुम्हारे हुनर की भी कोई कीमत नहीं ,
जब तुम्हारे पास नहीं पैसे की ताकत।

तुम तो नाहक ही कलम घिसते हो जी!
क्या तुममें इसे बेचने की है लियाकत?

यह जमाना तो दौलत का पुजारी है जी !
जिसके पास होगी वही पाएगा इनामात।

हमारे पास न दौलत,ना कोई ऊंची पहुंच ,
नाकामयाब ही रहेंगे चाहे हो काबिलियत ।

अब थक हारकर दिल को समझाया”अनु”ने ,
बेहतर है फिक्र को धुंए में उड़ाने की आदत ।

 

 

 

 

 

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