कुंडलियां – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

कोरोना के काल में, बिखर गया व्यापार
जीना संभव है नहीं, पड़े हुए लाचार।
पड़े हुए लाचार, कहाँ अब हम जाएं
बेगम बच्चों के साथ, बोल क्या हम खाएं।
हालत ऐसी देख, सभी को आता रोना
दिया जगत झकझोर, विपदा बनी कोरौना।

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