देखो गजब अजूबा हुआ।

देखा मैने समुंद्र सिमटा हुआ
किसी की चाह से लिपटा हुआ,
देखो एक गजब ही अजूबा हुआ
समुंद्र को नदी मे डूबा हुआ।

समुंद्र भी है खाली सा
फसा हो सब मकड़ी के जाल सा,
किसी मे खोना किसी मे पाना,
उसका यही मंसूबा हुआ,
देखो एक गजब ही अजूबा हुआ।

कैद है एक जिन कि तरह चिरागों मे,
वीराना खो गया वेराज्ञाओं मे,
चंद चमत्कार ही हुआ है केवल
तस्वीर भूल परछाई को छूता हुआ,
देखो गजब ही अजूबा हुआ।

न बारिश न हवाएं न पैगाम न दुआएं,
रोशन जो हुआ उसे भी बुझाए,
संभली हुई सी लताएं,
सूरज भी किसी का महबूबा हुआ,
देखो गजब अजूबा हुआ।

चंद उंगलियां वो भी सिमटी हुई,
बंद दरवाजे का राज एक चिमटी हुई,
मिली थी वो हवाओं से लिपटी हुई,
महफिल के सिवा न दूजा हुआ,
देखो जरा यहां भी
कैसा गजब अजूबा हुआ।

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