बेहिसाब सी जिंदगी।

बेहिसाब सी जिंदगी,
हिसाब छोड़ सब ले जाती है,
कल को कुरेद कुरेद कर,
बिखरे हुए को ओर बिखेर आती है।

शायद कहीं कुछ बाकी होगा,
वापस मोड़ उस राह की होगा,
भूले हुए को भी याद दिलाती है,
बेहिसाब सी जिंदगी,
कभी आकर बस बातें छोड़ जाती है।

चलते हुए एक अरसा सा हुआ था,
बेबाक वो आज भी रुलाती है,
दामन से लिपटा हुए का भी,
दाग वो छोड़ जाती है,
हिसाब छोड़ जाती है,
बेहिसाब सी जिंदगी
बस यादें छोड़ जाती है।

परेशानी, उलझन,
तर्पण, सब कुछ ले जाती है
जब याद आती तो बहुत सताती है,
बेहिसाब सी जिंदगी,
बस बेहाल छोड़ जाती है।

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