ऐ पहेली मै तेरे सामने हूं।

न सुबह में हूं न सांझ में हूं
ऐ मेरी पहेली मै तेरे सामने हूं।

ओझल ओझल सी तस्वीरें,
उठा लिया शब्दों के बीड़े,

न आमने हूं न जाम में हूं,
ऐ मेरी पहेली तेरे सामने हूं।

रहा ताउम्र बेहिसाब सा,
पौधो में खिलता मुरझाता गुलाब सा,

न रोशन से हूं न रोशिनी में हूं,
में तुझसे हूं में मुझमें हूं।
ऐ पहेली में तेरे सामने हूं।

न धुआं मैं हूं, न हकीकत में दिखूं,
पल पल में कुछ भी न लिखूं,

न वक्त से हूं न वक्त मे हूं
ऐ पहेली मैं तेरे सामने हूं।

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  1. joy 30/05/2021

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