जुबान पे लगाम

सोशल मीडिया हो या न्यूज मीडिया,

कौन लगाए इनकी जुबान पे लगाम।

 

बढ़ा चढ़ा कर जो घटनाओं को सुनाते,

असत्य को सत्य बनाकर सुबह शाम ।

 

आम नेता की छोड़ो प्रधान मंत्री को भी ,

नहीं बख्शते ,अपशब्द कहते सारे आम ।

 

ना कोई लिहाज है नहीं कोई शर्म इनको ,

नहीं इनके चरित्र में संस्कारों का कोई नाम ।

 

धन और झूठी लोकप्रियता हेतु बिक जाते है,

साबित कर दिया कितना गिर सकते है हम ।

 

मोबाइल क्या आया हाथ में फितरत बदल गई,

फेसबुक ,व्हाट्स अप ,ट्वीटर आदि में हुए गुम ।

 

ना घरवालों की सुध न ही घर का कोई होश ,

उंगलियां चलाते खटाखट छोड़ के सब काम ।

 

तिल का ताड़ बनाना तो कोई इनसे सीखे हजूर !

तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं सूचनाएं तमाम ।

 

इन्हें क्या नहीं पता इनकी गैर जिम्मेदाराना हरकतों से,

फैलेगी नकारात्मकता तो क्या होगा इसका अंजाम ।

 

हर आयु वर्ग के इंसान इनके संपर्क से नहीं अछूते ,

समाज पर इसका कितना बुरा जायेगा पैगाम ।

 

इसीलिए हम सरकार से करते है यह गुजारिश ,

साम दाम दण्ड भेद प्रयोग कर कसें इनपर लगाम ।

 

 

One Response

  1. Vijay Kumar Kansal 08/06/2021

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