मिलेंगे कभी तो फिर से होगा समझाना।

न मेने ही जाना न तुमने ही जाना
मिलेंगे कभी तो फिर से होगा समझाना,
कहानी भी वही जो मेरी ही हुई,
तकालुफ किस बात का
कभी और तुम मिल जाना,

न तूने है ठाना
न मैने बाटा है कोई बाना,
मिले हो जहां मे, जले चाहे कोई जमाना।
कभी तुम्हारा होगा आना कभी मेरा होगा जाना,
मिलेंगे फिर कभी तो फिर से होगा समझाना,

ये रुकना ये ठहरना, फजुल बैठे बैठे बतलाना,
हर गलियों का अब तो यही है फसाना,
कभी तुम ठहर जाना, कभी मेरा होगा बाहर जाना,
वक्त का पाबंद तो होना तो है एक बहाना,
आखिर मुझे अपने घर भी तो है जाना,
मिलेंगे फिर कभी तो फिर से होगा समझाना।

ये आना ये जाना ये मिलने का बहाना,
दुनिया मे है दुनिया का फ़साना,
कभी तुम बहक जाना, कभी मौसम का होगा आना,
चलती रहेगी दुनियां, दुनिया से क्या घबराना,
मिलेंगे फिर कभी तो फिर से ही समझाना ।

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