हो सके न तुम न हम तुम्हारे हुए ।

मेरे मरनेपर भी क्या नजारे होंगे
कोई गम तो तो किसी ने आंसू नकली सावरे होंगे
किसी की बातों के फव्वारे होंगे
थोड़े सामने तो कई किनारे होंगे,
हो सके न हम न कोई हमारे हुए।

मौत के न जाने ही कितने नजारे हुए,
तुमसे ज्यादा सितम तो हमारे हुए,
किसी का रोना किसी का बतलाना,
मरने के बाद भी हम न कवारें हुए,
हो सके न हम न कोई हमारे हुए।

हुई चार लकड़ी,
चार कंधों पे हसीना,
चले हो जहां, तुम गुजरे हो तुम कभी ना
जलने पर मिट्टी तुम्हे सम्हाले हुए,
हो सके न हम न तुम हमारे हुए।

रुपया ये पैसा सब पराए हुए,
किसी को जीता के किसी को हराए हुए,
दिल से जहां तक पाया था सब कुछ,
मरने पर न तुम हमारे न हम तुम्हारे हुए।

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