शक्ति छंद (फकीरी)

(शक्ति छंद)

फकीरी हमारे हृदय में खिली।
बड़ी मस्त मौला तबीयत मिली।।
कहाँ हम पड़ें और किस हाल में।
किसे फ़िक्र हम मुक्त हर चाल में।।

वृषभ से रहें नित्य उन्मुक्त हम।
जहाँ मन, बसेरा वहीं जाय जम।।
बना हाथ तकिया टिका माथ लें।
उड़ानें भरें नींद को साथ लें।।

मिले जो उसीमें गुजारा करें।
मिले कुछ न भी तो न आहें भरें।।
कमंडल लिये हाथ में हम चलें।
इसी के सहारे सदा हम पलें।

जगत से न संबंध कुछ भी रखें।
स्वयं में रमे स्वाद सारे चखें।।
सुधा सम समझ के गरल सब पिएँ।
रखें आस भगवान की बस जिएँ।।

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*शक्ति छंद* विधान:-

122 122 122 12

यह एक मात्रिक छंद है अतः 2 को 1 1 में तोड़ सकते हैं।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया

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