दुनिया एक भ्रम है।

मेरी न अब किसी से उमीद ओर न स्वप्न है,
जो था कुछ बचा कूचा वो भी सब अब खत्म है।

बेकार चली चाल मेने, दुनिया ही सब भरम है,
सो बात की एक बात कहुँ तो,
दिल की सफाई से बडा न कोई कर्म है।
दुनिया है ये सब एक भरम है

बेवजह का इधर उधर भागना
भरी नींद मैं भी पड़ता क्यों है जागना!
दिल की सीमा पड़े क्यों लांघना।
खुद के मन की करने मे भी क्या शर्म है
दुनिया ही ये तो एक भरम है।

चलो कभी बिना डगर के भी,
कहो कभी बिना मगर के भी,
चाँद तक भी दिल के सहारा है तुम्हरा,
ये दुनिया है न ये तुम्हरा न हमारा।
दुनिया एक भरम है।

न रोना न हसना न किस्मत न आरज़ू
आज वक़्त तुम्हरा है कल हमारा है।
दुनिया एक भरम है।

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