जो खुद ही सहारा ढून्ढ रहे

जो खुद ही सहारा ढून्ढ रहे

वो हमको सहारा क्या देंगे

कश्ती की हो तलाश जिसे

इस दिल को किनारा क्या देंगे

 

डगमगाते कदमो से

वो हमको कैसे संभालेंगे

जो बेघर बेघर फिरते हैं

वो हमको बसेरा क्या देंगे

 

जो खुद ही सहारा ढून्ढ रहे

वो हमको सहारा क्या देंगे

 

जो भटक रहे मंजिल पाने को

क्या हमको राह दिखायेंगे

जो अंधियारों में जीते हैं

वो हमको सवेरा क्या देंगे

 

जो खुद ही सहारा ढून्ढ रहे

वो हमको सहारा क्या देंगे

 

जो मृग तृष्णा में घूम रहे

क्या हमारी प्यास बुझाएंगे

जो कस्तूरी पाकर भी  है भ्रमित

सोचो हमे कहाँ ले जाएंगे

 

जो खुद ही सहारा ढून्ढ रहे

वो हमको सहारा क्या देंगे

 

7 Comments

  1. Sachin Wajage 23/05/2021
    • Archana Tiwari 24/05/2021
  2. 145 23/05/2021
    • Archana Tiwari 24/05/2021
  3. joy 30/05/2021
  4. ABHISHEK KR. GUPTA (RAHUL) 03/06/2021
  5. ABHISHEK KR. GUPTA (RAHUL) 03/06/2021

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