नही अब ओर नही।

नहीं अब और नहीं
तेरी जिंदगी मुझ तक नहीँ
काटी है मेने बिन आंसुओ की रात,
खाई है मेने आज दिल की मात
सुनो केश मेरी आखिरी ये बात।

नहीं अब ओर नहीं
मेरा ही दूर जाना होगा अब सही
न अब हम मिलेंगे न तुमसे कोई शिकयत होगी,
बेदिल अब किसी से न कोई इनायत होगी,
मैं जानती हूँ इस बात को,
तुम समझोगे नही शिकायते,
इसीलिए न कोई हिदायत होगी।

नहीं अब और नही,
तेरा एहसास दूरी का अब ओर नहीं
तुम खोये रहो मेहबूब मैं
ये मोह्बत भी क्या खूब है
आखिरी वक्त तक मैं तुम्हरे साथ हु,
फिर भी मै तुम्हीं से आघात हू,

जानते हुए भी की मंजिल कूछ ओर है,
तुझ तक कोई और है,
मैं टूट कर भी सम्हाल लूंगी,
कहीं से भी तेरा हाल लूँगी,
पर अब ओर नहीं,
तू गुम रहे इनायत तक,
तेरा मेरा साथ अब ओर नहीं
तेरी खुशि का यही फैसला ही है सही।
नहीं अब ओर नहीं।

Leave a Reply