जमाना याद आया ।

इसने खुद को किसी के दिल मे इतना सम्हला पाया,
बुजदिल हो गया जब भरे जमाने मे खुद को अकेला पाया।
टूट तो कबसे रहे थे,
बिखरे तो जब, जब कल का जमाना याद आया।

वो कहते तो थे तुम फिर संवर जाओगे,
फिर बेमौसम तुम भँवर लाओगे,
कहते तो हम क्या कहते,
फिर से बेवफा मोहब्बत का अफ़साना याद आया।

वक़्त का तराजू नही इश्क़ की दुनिया थी मेरी,
न साँझ था अकेला, खवाबो का बागमा था फैला,
वो मुनिया थी मेरी, हर रिश्ता उससे मेरा,
बिछड़े तो हर रिश्ता पुराना याद आया,
हर पल का वो मिल कर बिछड़ना याद आया।

आंखों मे थी जब बूंदे,
तेरा मुझसे आंख आँख चुराना याद आया,
छुप छिपा कर वो बतलाना याद आया,
मिलने के बहाने तुझमें खो जाना याद आया।
ढूंडा तो जमाने मे था तुझे,
तेरा मिलाकर यू बिछड़ना बहुत सताया,

शिशा ही तो हू, बिखरना था मुझे,
पर अफ़सोस मे क्यों तुझे पाना याद आया।
टूट तो कबसे रहे थे, बिखरे तो जब ,
जब कल का जमाना याद आया।

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