बेवजह क्यों ।

क्या कभी तुम्हे इतनी फिक्र हुई कभी मेरी,
की यूं हीं आज जता रहे हो,
माना कि तुम मजबूर थे,
अब बेवजह क्यों बीता हुआ याद दिला रहे हो,
जो था अब रहा नहीं,
तूने अपनाया है अब और कोई,
क्यों बीती बातें फिर बता रहे हो,
अब बेवजह क्यों सता रहे हो,

तुम्हे देखा था मेने खोते हुए
किसी की मुस्कुराहट बनते हुए,
वक्त गुजर गया अब तो,
अब फ़िर से तूफान ला रहे हो,
तुम बेवजह क्यों सता रहे हो।

देखा था मेने तुम्हे उस रोज,
कैसे तुम कल बना रहे थे,
कुछ उसकी कुछ तुम्हारी,
दोनो एक बना रहे थे,
मै बिना वजह परेशान थी,
कोई ओर अब तेरी जान थी।
कुछ मेने भी तुझे समझा था,
इसीलिए मैं इतना हैरान थी।
अब क्यों इतना मुझे सता रहे हो,
हारे हुए को हरा रहे हो।

तुम तो अब चले गए,
जिसका होना था हो गए,
जो पाना था पा गए
अब क्यों मुझे रुला रहे रहे हो,
बेवजह मुझे क्यों सता रहे हो
बेवजह मुझे क्यों सता रहे हो।

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