मैं जानती हूं उसे ।

मैं जानती हूं उसे,
मेरा हक किसी ओर को दे देगा,
मेरे से बंधी हर डोर वो खो देगा,
फिर से जिएगा उसी लहजे से वो,
इस बार तो बेवक्त भी कर देगा,
मैं जानती हूं उसे,
वो पहले जैसा ही जिएगा।

हाथ छोड़ते वक्त सोचा भी नहीं
था मजबूरियों से ज्यादा और कुछ भी नहीं
शायद इश्क उसने बेवजह करी थी,
वरना मेरे लिए तो इतनी कभी मजबूरियां नही थी।
मैं जानती हु उसे,
फिर से किसी की बेवजह बातों को सुनेगा।

बस हम ही किसी एक को वजह बना बैठे,
दिल ओ दिमाक मे उसे समा बैठे,
जिंदगी उसी तक जमा बैठे,
शायद यही वजह थी,
जो आज हम उसे गवां बैठे।
मैं जानती हूं उसे,
फिर से वो किसी और मे जिएगा,
जिंदगी का हर शब्द उसी से रहेगा।
मै जानती हूं उसे,

मेरी जगह किसी ओर को देगा,
सपने भी नए सिरे से सजाएगा,
आंखो की पलकें उठेंगी उसी से,
हर सांझ फिर से वो खो जायेगा,
पर इस बार वो
मजबूरी नही वो इश्क करेगा,
मेरे साथ जो खो चुका,
उसे पाने की नमुमकिन कोशिश करेगा।
मैं जानती हु उसे,
वो फिर से जिएगा।

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