यूं तो तेरे पास आ जाती मैं,
रूठा होता तो मना लाती मैं,
मेरी गैर हाजिरी की खुशी का अंदाजा है मुझे,
इसीलिए तेरी महफिल से ओझल हु मै,
वर्ना अपनी जीएस गस्त्ति उजाड़ कर भी
तेरा काफिला सजाती मै।

इसे तेरी खुशी समझूं या मेरे किस्मत की कमी है ये
कसर तो कोई नही छोड़ी मेने,
हर लकीरें भी तोड़ी मेने,
शायद खुद से भी ज्यादा चाह लिया था मेने तुझे,
वरना तूने तो बेवफाई मैं खुदा की कदर भी न छोड़ी थी।

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