हुई ।

तेरी सुबह अब कोई ओर हुई,
तेरी सांझ मे अब ओर कोई,
फिर क्यों दोपहर मे याद करा,
जब जिंदगी मे है मेरे शिवा कोई,

मानती हु ये मेरी किस्मत थी,
समझती हु अब ये तेरी आदत हुई,
मत कर तू इतनी भी परवाह,
की समझ लू मैं तेरी कबी हुई ही नहीं।

देख जरा खुद को तू
बदल गई है फिजाएं अब तेरी
ख्वाब ही तो हमारे हुए थे
उसमे भी अब कोई ओर तेरी हुई ।

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