मेरे आरोप नहीं तेरी झूठी ही गवाही है।
दिखा कर ख्वाब जो तूने जिल्लत मचाई है,
खुदा करे तू रहे दिल से गरीब,
कबी तूने भी जख्मों रातें तूने सजाई है।

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-देखा तो था खव्बों मे मेने
पर फिजाओं यूं ही बदल जाना बड़ा ताजुब है,
मालूम था की वक्त बदल जाते है अक्सर अच्छी अच्छी हस्ती के,
पर तेरा बेवक्त बदल जाना ताजुब था,
माना की अब और महफिलों मैं भी जाने लगा है तू,
तेरा ही बदल जाना रखुब्ज था।

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