जुदा हो जाऊँगा – डी के निवातिया

जुदा हो जाऊँगा
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कोई रोकना चाहेगा लाख फिर भी जुदा हो जाऊँगा
लगाकर गले मौत को,  जिंदगी से ख़फ़ा हो जाऊँगा !!
चाहकर भी कुछ न कर पायेगा य़ह तमाम ज़माना,
देखते देखते तुम्हारी महफ़िल से दफ़ा हो जाऊँगा !!
आज इल्ज़ाम देते हो बेवफाई का बेवजह मुझको,
देखना एक दिन सच में तुमसे मैं बेवफा हो जाऊँगा !!

अनगिनत फेहरिस्त लिखी है मुझ पर गुनाहों की,
जाने के बाद मैं भी नया कोरा सफा हो जाऊँगा !!

इससे पहले की सवाल आए तुम पर मेरी वजह से,
छोड़कर सब कुछ “धर्म” मैं इक तरफ़ा हो जाऊँगा !!
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स्वरचित: डी के निवातिया

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