औकात दिखा दी – डी के निवातिया

औकात दिखा दी

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इक बीमारी ने इंसानों को उनकी औकात दिखा दी,
इंसान के भेष में छुपे हुए हैवानों की जात दिखा दी !

कोई रोता अपनो को खोकर, कोई हँसता दिखता है,
कुछ के वारे न्यारे हुए किसी को काली रात दिखा दी !

लाशों के अम्बार लगे है, मरघट के सब दरवाजों पर,
मौत के सौदागरों द्वारा बेशर्मी की हर बात दिखा दी!

कालाबाजारी जोरों पर है, मुनाफाखोरो के जमघट ने,
बेचकर अपना ज़मीर, शर्म-ओ-हया को लात दिखा दी !

अपना पराया कौन यहां पर, किस पर करे भरोसा,
मजबूरी के आलम ने हालत ऐ कायनात दिखा दी !!

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डी के निवतिया

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