था।

पाया तो भी मेने कुछ,
फिर भी खोने का मुझे डर था,
अब जिंदगी ही चली गई
दिल जलना क्या कम था,

तू भूल गया है शायद,
इस बात को,
जिस कदर जलाया है तूने मुझे,
उसमे आग जरा काम था।
लुटेरों ने भी मुझे तब लूटा,
जब दीए मे भी तेल कम था।

इस कदर जलाया है तूने मुझे,
जिस कूऐ मे गए हम,
वो पानी नही छल था,
और क्या अब मे जमाने से लडू
जमाना भी कमभखत तुझ से था।

देख जरा गस्ति मेरी भी,
क्या खवाबो की हस्ती कम थी,
चेहरे का सीसा भी ले गया,
की जमाने का देखना भी कम था,
डुबोया भी है तूने उस जगह जहां,
आग का पानी भी कम था।

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