जला कर।

जहां इतने एहसान करे तूने,
मुझ पर इतना और अब कर दे,
यादों की लड़ियां है जो मेरी तेरे पास,
उन्हें जला कर राख कर दे।
की बचे न कोई वजह ऐसी,
झुके न मोहब्बत मेरे जैसी,
रहे न बेवफा कोई तेरे जैसा,
वक्त भी झुके मेरी वफाई पर,
खुदा भी तरस जाए,
मेरी खुदाई पर।
ले जाऊं मुहब्बत उस मुकाम तक,
ख्वाब भी मेरी देखभाल रखे,
तू भूल जाए नाम तक मेरा,
और जमाना तुझे मुझसे याद रखे।

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