हम रात भर सोते नहीं,
अगर तूम ख्वाबो मे होते नहीं
हकीकत समझ अपनाया है तुझे
गलत हो या सही
देखकर आंधीयों को अब
उजड़ जाने का अब खौफ नहीं
अरे खत्म करेगा क्या वो हमें
जिसके पास न हो सरजमीं
हम तो बस काफिले है मंजिलों के
बस जाये तो है सही
वरना कोई हमें गम नहीं ।

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