व्यक्ति ।

ये साथ भी भला क्या साथ हुआ
जिसमें व्यक्ति आघात हुआ
खंजर से हो या बातों से हो
पर बार यहां वार हुआ

है बूंदें सबकी लोचन में
देख जरा है सब सोचन में
दुनिया अब नहीं रही विमोचन में
तु बस चलता जा मस्त मगन

तेरे लिए दुनिया कि क्या है जंगन
अब व्यक्ति का न‌ होगा नदियों से संगम
तु निकट भला क्या लायेगा
दुनिया हो रही तुझसे तपन तपन

देख जरा पर्वत चोटी
देख जरा ये मैदान
न रहा अब कोई गांव चौपाल
फिर भी‌ है तु है पाहन समान
तु यूं ही जा सूना सबको
जाये न कोई अब कोई किसी के घर को
देख सब कुछ मिटता हुआ
कि कोई यहां किसी का न हुआ ।

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