हार ने मुझसे यूं पूछा l

हार ने मुझसे यूं पूछा
कि जीतोगे अब तुम कैसे
हमनें भी मुसकरा कर कह दिया
मानूंगा नहीं आसमां फेला है जैसे

कोशिश आगे बिखर जायेगा तू ऐसे
जैसे बिन माला मोती हो जैसे
तुझे देखता हूँ क्षितिज तक रहेगा कैसे
शून्य तो मेरा शुरू हुआ है
बिन निर नदी हो जैसे
तु कब ठहरेगा मेरे पग पर
मै नयी राह खोजूंगा
नदी रास्ता पलटती हो तेसे
हार यूं कहा है मुझसे
जाओगे आगे कैसे
सौ मील पिछे फेकूंगा
समंदर कि लहर हो जैसे
हमने कहा समंदर से
बिच समंदर में हूँ मुझे डुबोओगे कैसे
जाना तो मुझे अंत तक ही है
चाहे ऐसे चाहे वैसे ।

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