भक्ति छंद “कृष्ण-विनती”

भक्ति छंद “कृष्ण-विनती”

दो भक्ति मुझे कृष्णा।
मेटो जग की तृष्णा।।
मैं पातक संसारी।
तू पापन का हारी।।

मैं घोर अनाचारी।
तू दिव्य मनोहारी।।
चाहूँ करुणा तेरी।
दे दो न करो देरी।।

वृंदावन में जाऊँ।
शोभा ब्रज की गाऊँ।।
मैं वेणु सुनूँ प्यारी।
छानूँ धरती न्यारी।।

गोपाल चमत्कारी।
तेरी महिमा भारी।।
छायी अँधियारी है।
तू तो अवतारी है।।

आशा मन में धारे।
आया प्रभु के द्वारे।।
गाऊँ नित केदारी।
आभा वरनूँ थारी।।

ये ‘बासु’ रचे गाथा।
टेके दर पे माथा।।
दो दर्श उसे नाथा।
राखो सर पे हाथा।।
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लक्षण छंद:-

“तायाग” सजी क्या है।
ये ‘भक्ति’ सुछंदा है।।

“तायाग” = तगण यगण, गुरु
221  122  2
7 वर्ण  4 चरण
दो-दो चरण समतुकांत या चारों चरण समतुकांत।
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बासुदेव अग्रवाल नमन,
तिनसुकिया
10-02-19

One Response

  1. rashmidelhi 03/05/2021

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