हर मुश्किल को हल करता है

दिल को यूँ बेकल करता है,
जज्बातों से छल करता है।

बिधना की यह सृष्टि सारी,
तू क्यों फेरबदल करता है।

जो देता है दृष्टि लक्ष्य क,
वो ही राह सरल करता है।

अंतस में यदि द्वेष भरा हो,
अमृत को गरल करता है।

हंगामा हर रोज भीड़ का,
मंजर उथल पुथल करता है।

सबको पकड़ नही पाओगे,
पकड़ो जो पहल करता है।

धूप बहुत है दुर्गम है पथ,
चलना कर्म सफल करता है।

दुःख का सारा ताना बाना,
जीवन को प्रबल करता है।

जो ‘विनीत’ है मधुर हृदय है,
हर मुश्किल को हल करता है।

-देवेंद्र प्रताप वर्मा ‘विनीत’

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