तेरा ।

तेरे इंतजार मे आज भी वहीं हूँ,
जहाँ कल तुझे मिली थी,
याद है या भूल गये,
कभी मेरे आंगन मे भी
फूलों कि एक कली थी।

कूछ वादा. करके तूने
तू लकीरें लेकर निकली थी
सूने हाथों मेरे भी
कभी खुशी की लकीरें थी।
कभी मेरे आंगन मे भी
फूलों कि एक कली थी।

आओ आकर देखो मुझे
किसी भवरे से मे भी छली थी।
क्यों देखते हो मोहल्ले का दयोढा
कभी मे भी नवेली सी चली थी
कभी मेरे आंगन मे भी
फूलों कि एक कली थी।

चंद सी सांसों कि भी मोहताज हूँ मे,
याद है तुम्हें या भूल गये,
कभी मे भी तुझे ओढ
तेरी हो चली थी।
कभी मेरे आंगन मे भी
फूलों कि एक कली थी।

आखिर तक वादा था तुम्हारा
मे तो रास्ते मे ही मिली थी,
याद है या वो भी भूल गयें,
कभी तूम भंवरा और मे कली थी।
कभी मेरे आंगन मे भी
फूलों कि एक कली थी।

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