मिली।

तूम उस जगह से रूकसत हो चले
जिस जगह मे तुम्हें मिली
तूम तोड़ आये वो भी डगर,
जो जाकर तूमसे मिली
तूम तो निकले बे दिली
मे भी जरा थी जरा बेअदबी
तुम जिस सांचे मे ढले
वह मिट्टी भी मुझसे मिली,
किस्मत का देखो रंग है कितने
हम भी है जरा महजबीं
तु जाता रहा आखिरी तक
खुलदारी भी है मेरी जरा बंदी
तु अगर है एहसानफरामोशी
तो हम भी रखते है पेशगी।

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