लाशों का मेला।

लाशों का मेला आ चला है,
तू देख अकेला हो चला है ।
अपना अपना कहता था तू जिसे
वही पराया हो चला है।

देख जरा तस्वीर तू अपनी
तन भी अपना खो चला है।
वक्त भी देखो कैसा आया,
चार कंधे का हक भी छोड चला है।

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