काश मेरे पास भी कोई कबूतर होता।

काश मेरे पास भी कोई कबूतर होता,
जो मेरी बातों को अपने पंखों पर ढोता,

बिन कहे समझता कहाँ जाना है ।
कागज पर लगी स्याही को अपने गुटर गू से सूनता।
काश मेरे पास भी कोई कबूतर होता।

उड जाता लेकर दिल की बात यूं खूले आसमां में,
भरता उडान अपनी बिन रूके आसमां में,
जाता वहीं जहाँ मेरा दिल चाहे,
मेरे पिंजरे मन कि उडान वो भरता,
काश मेरे पास भी कोई कबूतर होता,

पलको के ख्वाबो को पंखों पर रखता,
मेरे दिल कि बात वो दिल में हि रखता,
भर लेता दिल के तूफानों कि हवा,
दूर कहीं मेरा भी फरिश्ता होता।
काश मेरे पास भी कोई कबूतर होता।

मेरे मन कि हर एक खबर रखता,
मेरे ओठों की हंसी वो ढूंढ लाता,
मेरे मन को खुला परिंदा वो बनाता
काश मेरे पास भी कोई कबूतर होता,

ले जाता जहाँ में चाहूँ,
करता वही जो मे चाहूँ,
सपनों को मेरे हकिकत मे सजाता,
ख्वाबो की रेल मेरे संग लाता,
काश मेरे पास भी कोई कबूतर होता ।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया 30/04/2021
    • rashmidelhi 30/04/2021

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