जख्म ।

मोहब्बत मे शायद तुझे कमी लगी,
जो दर्द देने लगा है तू।
सपनों भरे आँखों की जगह ,
आँसू देने लगा है तू

निशान शायद कम थे
जो जख्म देने लगा है तू।

शायद मुझ मे वो बात न थी,
जो मुझ तक रूका रहे तू,
या तुझमें ही जज्बात नहीं
जो किसी और को साथ लिए जा रहा है तू

निशान शायद कम थे
जो जख्म देने लगा है तू।

Leave a Reply