रात अंधेरी ।

दिन कि खडी धूप मे,
यू सोचती रहती हूँ मै,
कब रात अंधेरी आयेगी,
कब सांझ ये तेरी जायेगी।

बहुत खंगाले रास्ते मैंने,
बहुत गई मे मोड तलक,
कब घना पेड़ यूं छायेगा ,
कब शितल सी तेरी छाया मे,
रोशनी ये तेरी लायेगी,
कब रात अंधेरी आयेगी,
कब सांझ ये तेरी जायेगी।

थकी हारी कब तक मे
अपने घर को जाउंगी,
कब तेरी छाया मे
हसीन सपनो मे सो जाउंगी
कब रात अंधेरी आयेगी,
कब सांझ ये तेरी जायेगी।

दिन भर की भीड बहुत रह लिए,
हलचल दूनिया बहुत सेह लिए,
बाहर की हसीं बहुत हस लिए,
भीड कब यहां कि जायेगी,
कब रात अंधेरी आयेगी,
कब सांझ ये तेरी जायेगी।

कब तकिया रख , चादर ओढ
चांदनी कलियाँ तू खिलायेगी
कब रात अंधेरी आयेगी,
कब सांझ ये तेरी जायेगी।

2 Comments

  1. Vikas Kumar 27/04/2021
    • rashmidelhi 03/05/2021

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