बचपन जी आते है।

चल आज बचपन जी लेते है।
किसी की चूंटी काट
मांँ के आँचल मे छुपते है ।
चल आज बचपन जी लेते हैं।

कहीं किसी की छत फांद
पतंग कि डोर थाम लेते है ,
खुद काका बन
छडी थाम लेते है।
चल आज बचपन जी लेते हैं।

नये नवेली दिवारों को
आ अपने सपनों मे रंग देते है
सामने बैठी अम्मा को
किलकारी से भर देते है ।
चल आज बचपन जी लेते हैं।

उडते हुये जहाजो के साथ
आज हम दौड लगाते है।
बहते हुये पानी मे आज
अपनी नाव दौडाते हैं ।
बैठी हुई अम्मा को भी,
उनका बचपन हम दिखाते हैं।
चल आज बचपन जी लेते हैं।

अपने साथी संगी के संग
सपनों की दौड लगाते है,
अपने घर के नल से हम
खेल का मटका भर लाते है ,
चल आज हम स्कूल घूम आते है
चल आज बचपन जी लेते हैं।

डिजिटल दूनिया को छोड़ कर
गली मे शोर मचाते है
किसी सख्त काका के कहने पर
खडूस काकी के घर छिप जाते है
चल यार
आज बचपन जी आते हैं।

3 Comments

  1. Harry 25/04/2021
    • rashmidelhi 25/04/2021
    • rashmidelhi 28/04/2021

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