काश !

काश ! मेरा भी कोई अपना होता,
जो हर बात मे मुझे याद करता ,
ढूंढता मुझे इधर उधर
मेरे रोने पर वो भी रोता
काश !
मेरा भी कोई अपना होता।

मेरी सपनों को वो पर देता,
मेरे दुःखो को हर लेता,
पकड लाता मुझे नाराज होने पर,
उसका भी मेरे साथ कोई सपना होता
काश ! मेरा भी कोई अपना होता,

कभी हसीं की ठिठोली करता,
कभी पिता बन मुझे सभाँता,
थक जाउ जब भी मैं,
उसके कंधे पर मेरा संर होता
काश ! मेरा भी कोई अपना होता,

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