हुकूमत

हुकूमत ने रिआया पर
गजब एह्सान कर डाला
बनाने मंदिर निकले थे
शहर शमसान कर डाला

बढे थे दाम बिजली के
शहर मे रौशनी कम थी
चिताओ को जलाकर के
शहर शमसान कर डाला

जला डाली भरी बस्ती
महज कुछ रौशनी खातिर
उजाले घर मे करने को
शहर को राख कर डाला

हवा मे मौत है फैली
न जाने कैसा घोटाला है
दिखाकर अच्छे दिन के सपने
किसी ने सांसे छीन डाला है

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