“ओ रे ” परिंदे

‘ओ रे’ परिंदे तू किधर जा रहा है ,
जाना था पश्चिम तू पूरब उडे जा रहा है।
संदेश तेरा ये क्यूँ छोडे जा रहा है,
ओ रे परिंदे तू किधर जा रहा है ।

ख्वाबो चिट्ठी तू क्यों छोडे जा रहा है,
दूर तुझसे हवा ये हुआ जा रहा है,
देख पश्चिम को सूना तू करें जा रहा है ।
‘ओ रे’ परिंदे तू किधर जा रहा है ।

चहचहाती सुबह को तू यहां भूलें जा रहा है,
अरमानों का ये घोसला क्यों तोडे जा रहा है,
देख तेरा साथी जो तू छोड़े जा रहा है ।
‘ओ रे’ परिंदे तू किधर जा रहा है ,
जाना था पश्चिम तू पूरब उडे जा रहा है।

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