शायरी

वक्त हुआ हम खुशमिजाज
थे सो चल दिये,
उन्होंने बुलाया
हम पंख लगाकर उड लिए,
दिल की बेसब्री को न रोक सके,
हमने उन्हें आदाब कहा ,
और वो
खुदा हाफिज़ कहकर निकल लिए।

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