जनता की मजबूरी

नेता और जनता की
ये कैसी आंखमिचोली है
की नेता कितने घाग
जनता कितनी भोली है
दोनों ही इस बात को
बखूबी जानते है
पर कोई आदत से
मजबूर है
और कोई मजबूरी
से मजबूर है
ये मजबूरी ही तो है
जिस कारन
जनता को नेता की
जीत का जश्न भी मनाना है !
और कोरोना से मरने
वाले अपनों का मातम भी !

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