झूठी तसल्ली देकर उम्मीदें न जगावो ….. भूपेन्द्र कुमार दवे

झूठी तसल्ली देकर उम्मीदें न जगावो
मेरी कोठरी बुझे चिरागों से न सजावो।

दरवाजे अगर बंद हैं खिड़की तो खोल दो
मासूम जिन्दगी को कैदखाना न बनाओ।

हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई का भाईचारा
यह सभ्यता की निशानी है इसे न मिटाओ।

ये ऊँचनीच व भेदभाव कचरा ही तो है
अब स्वच्छता अभियान में इन्हें तो हटाओ।

धर्म तुम्हारा हो या किसी और का भी हो
बेसबब उसे नफरत का पुलिंदा न बनाओ।
….. भूपेन्द्र कुमार दवे
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