होली2021…………….देवेश दीक्षित

होली में मखमली रंगों से

छिपा था मेरा चेहरा

नजर न आया किसी को मैं

ऐसा हुआ था चेहरा

 

पानी से सराबोर था मैं

खड़ा था सड़क पर गीला

सड़क भी हो गई थी गीली

और मैं खड़ा था अकेला

 

चारों तरफ नजर दौड़ाई तो

दिखा रंगों का मेला

जिसमें रंगे खड़े थे लोग

खड़ा था रंगों का ठेला

 

हरा दे दो पीला दे दो

और दे दो रंग काला

ऐसे न ऊपर रंग डालो

औरों को भी है लगाना

 

होली का मजा तो लेलो

सबको बाद में लगाना

मौका न मिलेगा देखो

साल में फिर दोबारा

 

कोरोना नहीं गया अभी देखो

बंदिश में इसने डाला

होली खेलने पर नियंत्रण रखो

वरना आ जाएगा दोबारा

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देवेश दीक्षित

One Response

  1. sumit 03/04/2021

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