कोसों दूर रहती है वो…………….देवेश दीक्षित

प्यार मुहब्बत और रोमांस से

कोसों दूर रहती है वो

जिम्मेदारी का कर्तव्य लिए है

मुझे भी सिखाती है वो

 

खुद की कभी गलती नहीं है

ऐसा मुझे कहती है वो

अक्सर काम में डूबी रहती है

मुझसे दूर रहती है वो

 

कभी अगर काम नहीं है

तो फोन पर चिपक जाती है वो

एक बात भी नहीं सुनती है

मुझे निराश कर देती है वो

 

सुबह को जब भजन सुनती है

मेरे लिखने में बाधा डालती है वो

तब तक बार – बार टोकती है मुझे

जब तक लिखना छुड़वा नहीं देती है वो

 

बीच मजधार में रह जाता हूं मैं

ऐसा लाचार कर देती है वो

सोच – सोच कर रह जाता हूं मैं

ऐसा रिदम तोड़ देती है वो

 

क्या कहूं मैं उसके बारे में

घर को लेकर चलती है वो

प्यार मुहब्बत और रोमांस से

कोसों दूर रहती है वो

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देवेश दीक्षित

7982437710

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